विचारणीय प्रश्न
उत्तर- रोहित सरदाना तो महंगे हॉस्पिटल में इलाजरत थे, अंग्रेजी दवा वालों ने उनको बचा क्यों नहीं लिया ?
उत्तर- तो क्या डॉक्टर्स बिजनस नहीं करते है ?
उत्तर- तो क्या हॉस्पिटल वाले समाजसेवी हैं ?
उत्तर- क्या रेमडीसीवीर कोरोना की दवा है ? अगर है तो फिर WHO ने उसे कोरोना के इलाज से हटा क्यों दिया ? क्या किसी एक दवा का नाम बता सकते हैं, जिसे डॉक्टर्स कोरोना की दवा कह सकें ?
उत्तर- तब तो आपको खुश होना चाहिए। क्योंकि बेकार दवाएं बेचने के चलते शीघ्र ही उनकी कम्पनी बन्द हो जाएगी। फिर आपको चिंता क्यों ?
उत्तर- एलोपैथ से कोरोना ठीक हो जाएगा, इसकी गारंटी कौन डॉक्टर दे रहा है ? पूछकर बताइए।
उत्तर- तो क्या आयुर्वेद ने नहीं किया है ?
उत्तर- अभी- अभी रेमडीसीवीर और ऑक्सीजन सिलिंडर को सैंकड़ों गुना महंगे दामों में किसने बेचा था ? कोरोनिल और पतंजलि की दवाएं अपने प्रिंट रेट से कितने गुना महंगे दामों में बिक रही हैं ? बताइए । कोई हिसाब है आपके पास ?
उत्तर- जितना विदेशी और एलोपैथ फार्मा दवा कंपनियों ने देश की जनता को लूटा है, उसका 1% भी पूरी प्रमाणिकता के साथ कहा जा सकता है कि आयुर्वेदिक कम्पनियों ने नहीं लूटा है।
उत्तर- फेयर एण्ड लवली ने तो पूरे विश्व को गोरा बनाने की कसम खाई थी, तो क्या बन गए सब गोरे ? उस पर कब एक्शन लेंगे ?
उत्तर- डाबर, बैद्यनाथ का विरोध आज तक आपने क्यों नहीं किया ? कमी केवल पतंजलि में ही क्यों दिखती है ?
उत्तर- और लाखों के इंजेक्शन आपको महंगे नहीं लगते ? केवल आयुर्वेद औषधियां ही महंगी दिखती हैं ? जब तक मार्केट में पतंजलि नहीं थी, तब तक डाबर, बैद्यनाथ आदि कम्पनियां महंगे दामों में दवाईयां बेचती थीं। अब उन्हें भी तो पतंजलि के कारण दाम करने पड़े हैं। इतिहास उठाकर देख लीजिए।
उत्तर- पतंजलि में कुछ तो विशेषता है, तभी तो प्रतिस्पर्धा में भी उसने बाजार में अपना स्थान बनाकर रखा है।
उत्तर- तो क्या डॉक्टर्स रामदेव और आयुर्वेद की निंदा नहीं करते है ? हमने तो सैकड़ों डॉक्टरों को आयुर्वेद के विरुद्ध जहर उगलते देखा है।
Comments
Post a Comment